Tag: poem

I Say Chaps

Nostalgia

सुनो, आज फिर मिलते हैं, कुछ क़िस्से पुराने सुनाते हैं, कुछ गीत नए गुनगुनाते हैं।   वो बचपन की मधुर यादें, वो नानी दादी की बातें, वो सपने पतंग के पेंच के, वो, अफ़साने शीला की जवानी के, गाँव के पुराने बरगद की छांव, वो बारिश में काग़ज़ की नाव, वो कैंची डंडे की साइकल,…
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June 27, 2021 0

ये समर विशेष है

(२) ये समर विशेष है समय वस्तुतः बड़ा विचित्र है। पुष्प लहलहा रहे बाग़ में, पंछी चहकते नील गगन में, वातावरण सिंचित है प्राण वायु से किंतु प्राण संशित है वातावरण से, मनुज बँधा भय की लक्ष्मण रेखा में,  पशु स्व्क्छंद विचारते शहर शहर में।  विचित्र ये नहीं कि समर फिर सज़ा है प्रलय और विलय के काल कुरुछेत्र में, अपितु ये…
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April 3, 2020 2

गुफ़्तगू

एक शाम यादों में , एक शाम आहों में। एक पुराना बरगद और उसपे बैठा इक परिंदा। गाँव की गलियाँ वो रंगरलियाँ, इमली के पेड़ और गुड़ की डलियाँ , एक तेरे शहर का शोर और , एक ख़ामोशज़दा बाशिंदा, बरगद टूट रहा, साथी छूट रहा, परिंदा बेचैन है फ़िज़ाओं में । एक शाम आँखों…
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December 27, 2019 0

टहलते कदम…

एक उम्र से एक मुकाम की तलाश में… जाने कब किस ओर ले कर चलते हैं मुझको ये मेरे टहलते कदम। मैं तो बस मैं हूं…घुमड़ते अब्र सा हवाओं के रुख पर टहलता हूं। एक उम्र से एक मुकाम की तलाश में… पथरीले रास्तों पर कभी खुशनुमा वादियों में कभी लहरों के वेग सा चपल…
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March 12, 2019 6