Badal

गहरे मानसून का बादल हूँ, बन के मोती पिघलता हूँ, ग़र करोगे याद पाओगे मुझे मैं हर सावन सफ़र करता हूँ । मैंने देखा है तेरी आँखों में यादों की एक कशिश सी, वो शिकवे वो शिकायतें, जज़्ब अरमानों का वो सूखा दरिया, अबकी ऐसा करता हूँ, तेरी ही छत से होके गुजरता हूँ, बस…
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July 14, 2021 0