Month: December 2019

I Say Chaps

सफ़र

चाहतें यूं ही नहीं अक्सर मंज़िल को तरस जाती हैं,बस्ती और वीराना दोनों मुझसे नाराज़ है। सैलाब कब का, पशेमां हो कर गुज़र चुका है, हवाओं को नजाने क्यों खुद पे नाज़ है। वफ़ा सरे राह बैठी है एक तल्मीह के इंतज़ार में, जाने तेरे रुखसार में वो क्या इक राज़ है। शायरी क्या है…
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December 31, 2019 1

गुफ़्तगू

एक शाम यादों में , एक शाम आहों में। एक पुराना बरगद और उसपे बैठा इक परिंदा। गाँव की गलियाँ वो रंगरलियाँ, इमली के पेड़ और गुड़ की डलियाँ , एक तेरे शहर का शोर और , एक ख़ामोशज़दा बाशिंदा, बरगद टूट रहा, साथी छूट रहा, परिंदा बेचैन है फ़िज़ाओं में । एक शाम आँखों…
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December 27, 2019 0

Euphoria Infinite

I had been a fiddle-footed gadabout especially with regards to my thoughtful sojourns in social gatherings and events but this Fais-dodo of excitement was different. I had been pulled, lured, cajoled and sculpted to make my first stage appearance in the past forty years. On that cold winter evening when the mercury had stooped so…
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December 24, 2019 8