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Badal

गहरे मानसून का बादल हूँ, बन के मोती पिघलता हूँ, ग़र करोगे याद पाओगे मुझे मैं हर सावन सफ़र करता हूँ । मैंने देखा है …

मेरे हृदय की अविरल गंगा

(1) नतमस्तक बैठा हूं सुनहरी सांझ के गलियारों में हृदय में अपने सृजन की विस्मित झंकार लिए, गर्भ की चोटिल हुंकारों का, विरही तन की …

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