Tag: poems

I Say Chaps

Badal

गहरे मानसून का बादल हूँ, बन के मोती पिघलता हूँ, ग़र करोगे याद पाओगे मुझे मैं हर सावन सफ़र करता हूँ । मैंने देखा है तेरी आँखों में यादों की एक कशिश सी, वो शिकवे वो शिकायतें, जज़्ब अरमानों का वो सूखा दरिया, अबकी ऐसा करता हूँ, तेरी ही छत से होके गुजरता हूँ, बस…
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July 14, 2021 0

कुरुक्षेत्र

समय आया बड़ा विचित्र है,क्षितिज पर अजीब चित्र है,धरा का भी हाल बेहाल है,दिशाओं में फैला काल है,व्याधि घुली है फिज़ाओं में,आसमानी सागर भी लाल है,पार्थ संबोधित है अर्जुन से,खड़ा कलयुगी कुरुक्षेत्र में।। पतंगा लील रहा ज्योति को,दूषित, कलुषित जल गंगा का।आदि चीख रहा अनादि को,व्यभिचारी सुर मन मृदंगा का।किस्से और क्यों मैं समर करूं,धर्म…
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January 1, 2020 3

मेरे हृदय की अविरल गंगा

(1) नतमस्तक बैठा हूं सुनहरी सांझ के गलियारों में हृदय में अपने सृजन की विस्मित झंकार लिए, गर्भ की चोटिल हुंकारों का, विरही तन की मरमित पुकारों का, ज्वर से तपती रातों में बोझिल आंखों के करुण कृंदन का, नादान बचपन की कहानियों पर बरसते तेरे स्नेहिल चुंबन का, मेरी हर भृमित जीत पर उड़ते…
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March 8, 2018 2