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    Nostalgia

    सुनो, आज फिर मिलते हैं, कुछ क़िस्से पुराने सुनाते हैं, कुछ गीत नए गुनगुनाते हैं।   वो बचपन की मधुर यादें, वो नानी दादी की बातें, वो सपने पतंग के पेंच के, वो, अफ़साने शीला की जवानी…

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    ये समर विशेष है

    (२) ये समर विशेष है समय वस्तुतः बड़ा विचित्र है। पुष्प लहलहा रहे बाग़ में, पंछी चहकते नील गगन में, वातावरण सिंचित है प्राण वायु से किंतु प्राण संशित है वातावरण से, मनुज बँधा भय की लक्ष्मण रेखा में,  पशु स्व्क्छंद विचारते…

  • Poems

    गुफ़्तगू

    एक शाम यादों में , एक शाम आहों में। एक पुराना बरगद और उसपे बैठा इक परिंदा। गाँव की गलियाँ वो रंगरलियाँ, इमली के पेड़ और गुड़ की डलियाँ , एक तेरे शहर का शोर और ,…

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    टहलते कदम…

    एक उम्र से एक मुकाम की तलाश में… जाने कब किस ओर ले कर चलते हैं मुझको ये मेरे टहलते कदम। मैं तो बस मैं हूं…घुमड़ते अब्र सा हवाओं के रुख पर टहलता हूं। एक उम्र से…