Poems

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ये समर विशेष है

(२) ये समर विशेष है समय वस्तुतः बड़ा विचित्र है। पुष्प लहलहा रहे बाग़ में, पंछी चहकते नील गगन में, वातावरण सिंचित है...

April 3, 2020
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शिशिर की ठिठुरती रात

ठंडी, सूनी श्यामल राहों को, शबनम की बूंदों का साथ है, ये शिशिर की ठिठुरती रात है। धूमिल चांदनी, चढ़ता...

January 10, 2020
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कुरुक्षेत्र

समय आया बड़ा विचित्र है,क्षितिज पर अजीब चित्र है,धरा का भी हाल बेहाल है,दिशाओं में फैला काल है,व्याधि घुली है...

January 1, 2020
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सफ़र

चाहतें यूं ही नहीं अक्सर मंज़िल को तरस जाती हैं,बस्ती और वीराना दोनों मुझसे नाराज़ है। सैलाब कब का, पशेमां...

December 31, 2019
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गुफ़्तगू

एक शाम यादों में , एक शाम आहों में। एक पुराना बरगद और उसपे बैठा इक परिंदा। गाँव की गलियाँ...

December 27, 2019
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टहलते कदम…

एक उम्र से एक मुकाम की तलाश में… जाने कब किस ओर ले कर चलते हैं मुझको ये मेरे टहलते...

March 12, 2019
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होली आई

    सुन्दर सजल रंगीले, कुछ लाल कुछ पीले, मेरे ख्वाबों के दस्ते। पलाश के फूलों की महक लिए, आंखों...

February 26, 2018
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