Showing: 1 - 8 of 8 RESULTS

ये समर विशेष है

(२) ये समर विशेष है समय वस्तुतः बड़ा विचित्र है।  पुष्प लहलहा रहे बाग़ में,  पंछी चहकते नील गगन में,  वातावरण सिंचित है प्राण वायु …

कुरुक्षेत्र

समय आया बड़ा विचित्र है, क्षितिज पर अजीब चित्र है, धरा का भी हाल बेहाल है, दिशाओं में फैला काल है, व्याधि घुली है फिज़ाओं …

सफ़र

चाहतें यूं ही नहीं अक्सर मंज़िल को तरस जाती हैं,बस्ती और वीराना दोनों मुझसे नाराज़ है। सैलाब कब का, पशेमां हो कर गुज़र चुका है, …

गुफ़्तगू

एक शाम यादों में , एक शाम आहों में। एक पुराना बरगद और उसपे बैठा इक परिंदा। गाँव की गलियाँ वो रंगरलियाँ, इमली के पेड़ …

टहलते कदम…

एक उम्र से एक मुकाम की तलाश में… जाने कब किस ओर ले कर चलते हैं मुझको ये मेरे टहलते कदम। मैं तो बस मैं …

होली आई

    सुन्दर सजल रंगीले, कुछ लाल कुछ पीले, मेरे ख्वाबों के दस्ते। पलाश के फूलों की महक लिए, आंखों में हुड़दंग की ललक लिए, …

Follow Me!
%d bloggers like this: